सोमवार, 23 मई 2016

****पथिक ****

****पथिक ****
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पथिक !
तू पथ पर बढ़ आगे
मेघों की हलचल ,
सरिता की कलकल ,
रोक सके ना बढ़ आगे,
साहस तेरा अग्निपथ -गामी
लड़ जा तू तूफानों से ,
अपनी इच्छा शक्ति बल पर -
टकरा जा चट्टानों से ,
सृजित हों बाधा कैसी भी
तू निर्भीक होकर बढ़ आगे ,
कोई रोक सके ना बढ़ आगे ।

महापाप के मर्दन हेतु -
महादण्ड  का कर विधान,
ललकार भरे जो भी व्याधा -
उसे हिमकुंड में कर दफ़न,
देख अमिट कृत्य तेरा -
दसो दिशाएं गुणगान करें ,
धरती अम्बर जलधि सारे -
तुझपर अपना अनुराग रखें ,
महाप्रताप के महातप से -
तू हर बाधा का कर विनाश ,
प्रीत के रंग में रंग जा तन-मन -
जगहित में ऐसा कर विकास,
दे चुनौती वज्रपात को -
तू हर हाल में बढ़ आगे ,
कोई रोक सके ना बढ़ आगे ।

जन्मे जो भी इस धरती पर -
कालकवलित हुए सभी ,
वक्त की आंधी में छितराके -
अनजाने से  लुप्त सभी ,
साहस शिखर पर चढ़ने वाले -
लाल अनोखे हुए सदा ,
उनकी ही उंगली पर देखो -
इतिहास नर्तन करें सदा ,
ऐसा कृत्य दिखा जरा तू -
पर्वत का सीना  सिहर उठे,
सिंह गर्जना कर दे ऐसी -
पापों का रावण कम्पित हो ,
भेद-भाव और ईर्ष्या सारी -
भूगर्भ में  लंबित हों ,
तू अदम्य सहस से बढ़ आगे ,
कोई रोक सके ना बढ़ आगे ।

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